शनि का मीन राशि में गोचर और प्रभाव
- seemavedic
- 6 days ago
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सौर मंडल के ग्रह मंडल में शनि ग्रह का विशिष्ट महत्व स्थान है और वैदिक ज्योतिष में दीर्घकालिक प्रभाव डालने वाला सर्वाधिक महत्वपूर्ण ग्रह है।एक ही राशि में सबसे अधिक ढाई वर्ष रहने वाले शनि का राशि परिवर्तन ज्योतिष की एक बहुत बड़ी घटना है जो कि तीस साल के चक्र में पूर्ण होती है ,और इसीलिए कुंभ से मीन राशि में शनि का गमन अति महत्वपूर्ण हो जाता है,क्योंकि यह तीस वर्ष के चक्र का अंतिम गोचर है। काल पुरूष के अंतिम भाव में शनि का गोचर कुछ अर्थों में पिछ्ले साढ़े सत्ताईस वर्षों का लेखा-जोखा लेकर सभी परिस्थितियों को एक पूर्णतः देने और नये सत्र के लिए आधार निश्चित करने का कार्य है। शनि कर्मानुसार फल देने वाला ग्रह है।और इसीलिए इसे न्यायाधिकारी और दंडाधिकारी भी कहा जाता है।
वहीं दूसरी ओर राहु मीन राशि के प्रारंभिक अंशों पर वक्री गति से शनि की ओर अग्रसर है। जहां शनि के लिए मीन राशि चक्र की अंतिम राशि है, वहीं राहु के लिए यह चक्र की पहली राशि है। राहु कार्मिक ग्रह है किन्तु उसकी यात्रा ऊपर से नीचे जाने की है,और शनि की नीचे से ऊपर जाने की। शनि के मीन में संचरण के साथ ही राहु , शनि के साथ आकर मिल जाएंगे और इस मुलाकात में वह शनि को अभी और पीछे का सारा लेखा जोखा देंगे। क्योंकि राहु शनि के अनुसार ही चलते हैं तो राहु से सारा लेखा-जोखा शनि महाराज यहीं लेने वाले हैं।और फिर आने वाले सालों में शनि वैसे ही न्याय करेंगे।
शनिवार दिनांक 29 मार्च 2025 को रात 10 बजे शनि के मीन में प्रवेश करते ही शनि और राहु की यह विशिष्ट युति होगी जो की आने वाले दिनों में शिखर पर होगी।
शनि राहु की यह युति,शनि अमावस्या की रात में सूर्यग्रहण के कुछ समय बाद और नवसंवत्सर के प्रारंभ होते ही हो जायेगी, इसलिए इसके बड़े और दूरगामी प्रभाव होंगे जो आने वाले कई वर्षों तक दृष्टि गत होंगे।
इन प्रभावों और उसके परिणामों की चर्चा और विश्लेषण अगले शनि राहु युति शीर्षक में करेंगे।
शनि के मीन राशि में प्रवेश के समय मीन राशि सूर्यग्रहण से पीड़ित है।मीन राशि से ही नवसंवत्सर/ नववर्ष प्रारंभ हो रहा है और वहीं पर षडग्रही योग भी बन रहा है ।साथ ही ग्रहों की दशाएं भी प्रतिकूल हैं। शुक्र वक्री है,बुध वक्री होने के साथ ही अस्त हैं। सूर्य व चंद्र ग्रहण योग में हैं और राहु प्रबल हैं। ऐसे में शनि का मीन राशि में जाना बहुत ही उतार चढ़ाव से जुड़े घटनाक्रमो वाली स्थिति साबित होने वाली है।
शनि के मीन में प्रवेश करते ही मकर राशि की साढ़ेसाती समाप्त हो जायेगी।कुंभ राशि की साढ़ेसाती की अंतिम ढैया शुरू होगी।मीन राशि की मध्य या हृदय पर ढैया शुरू होगी। इसके साथ ही मेष राशि की साढ़ेसाती प्रारंभ होगी।
कर्क राशि की कंटक शनि अष्टम ढैया और वृश्चिक राशि की लघु शनि चतुर्थ ढैया समाप्त होगी,तो वहीं दूसरी ओर सिंह राशि और धनु राशि की ढैया प्रारंभ हो जायेगी।
शनि के इस गोचर का प्रभाव सर्वाधिक रूप से मानसिक स्थिति पर पड़ेगा। विश्व, देश, समाज और आपसी संबंधों में शनि का यह प्रभाव प्रारंभ में व्यापक रूप से और बाद में अन्य गोचर के बदलने के साथ कम या अधिक रूप से जनमानस,प्रजा , जनता, संबंधों और अन्य प्रकार के व्यक्तिगत और जनसमूहों पर दिखाई देगा।
एक ओर जहां इस गोचर के प्रभाव से लोगों में , व्यवस्था में, व्यवहार में अस्पष्टता,एंबीग्यूटी,मेंटल फागिंग,जैसे अनुभव होंगे, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग और संसथानया व्यवस्थाएं अपना बुद्धि चातुर्य दिखाने का प्रयास करेंगे।
बुद्धि कौशल अपने चरम पर होगा।ठगी और फ्राड की घटनाएं और प्रवृत्तियों में बढ़ोत्तरी होगी। इंटरनेट ठगी की घटनाएं जहां एक ओर बढ़ेंगी,वहीं दूसरी ओर उनके नियंत्रण के लिए भी शासन तंत्र सक्रिय होगा।
लोगों में सही ,गलत की पहचान करना मुश्किल होगा। रिश्तों में खींचतान और असंतोष बढ़ेगा।जन मानस में विरक्ति की भावना बढ़ेगी ।निराशा और उदासीनता हावी रहेगी । संगीत और वाणी कमाने वाले सुर्खियों में रहेगें।कुटिल बुद्धि वाले सक्रिय और प्रभावी रहेंगे।
छोटे बच्चों को लेकर विशेष सावधानी बरतें। जहां भी बच्चें अकेले हो , जहां भी बच्चें इकट्ठे होते हों अनअटेंडेट ना छोड़े।
स्कूल, संस्थान, प्लेग्राउंड, प्ले स्कूल, स्कूल वाहन जैसे स्थानों पर सभी व्यवस्थाओं, उपकरणों, कार्य संचालन,और प्रणालियों एवं बच्चों से संबंधित व्यवहारों में अति सतर्कता बरतें। चौकन्ने रहें।जिससे किसी भी अप्रिय स्थिति या घटना से बचा जा सके । लड़कियों, बच्चियों का विरोध ध्यान रखें।
युवा वर्ग , किशोरों और बड़े होते बच्चों में प्रेम प्रसंग या डेटिंग या आउटिंग के प्रति सावधान रहें।और किसी भी अप्रिय घटना से बचने व बचाने का प्रयास करें।
शासन प्रशासन के द्वारा शिक्षा और किशोरों व युवाओं से संबंधी मुद्दों को लेकर, पाठ्यक्रम, जागरूकता कार्यक्रम , सहायता समूह , सुधार कानून, नियम इत्यादि बनाए जा सकते हैं।
श्रमिक और मजदूर वर्ग असंतोष के चलते उद्वेलित और संघर्ष पूर्ण हो सकता है।
गुरु की सशक्त स्थिति और नियंत्रंण के कारण नकारात्मक परिस्थितियों को संतुलित करने का प्रयास ग्रह मंडल द्वारा चलता रहेगा।तो भी प्रत्यक्ष और परोक्ष रूप से आश्रमों, मठों, धार्मिक संस्थाओं और न्यायपालिका पर प्रश्न चिन्ह लगते रहेंगे। शिक्षकों, धर्म गुरूओं, संतों, न्यायधीशों के व्यक्तित्व, कार्यकलापों, वक्तव्यों पर प्रश्न उठेंगे ,विवाद बढ़ेंगे और प्रतिष्ठा को मलिन करने का प्रयास होगा ।
मौसम में होने वाले परिवर्तन तीव्र होंगे,ठंडे प्रदेशों, में ठंड की तीव्रता बढ़ेगी और सर्दियां अत्यधिक ठंडी रहेंगी। समुद्रों, में हलचल बढ़ेगी।झीलों और नदियों के जलऔर प्रवाह में तेज परिवर्तन आयेंगे। पृथ्वी के नीचे की हलचलें भी बढ़ेगी भूकंप, भूस्खलन के साथ ही पृथ्वी के गर्भ से कुछ उपयोगी खनिजों की भी खोज और प्राप्ति हो सकती है। शनि के गोचर के कुछ विशेष परिवर्तन का विश्लेषण अगले लेख में करेंगे।
जय श्री कृष्ण 🌹 🌹 🙏
सीमा श्रीवास्तव
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