नवसंवत्सर विक्रम संवत 2082
- seemavedic
- Mar 27
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हिंदू नववर्ष अथवा नवसंवत्सर प्रारंभ चैत्र शुक्ल प्रतिपदा से होता है।इस वर्ष विक्रम संवत 2082 का शुभारंभ रविवार 30 मार्च को होगा। इस नए वर्ष की विशेषता यह है कि नववर्ष के प्ररंभ में15 दिन के पक्ष में कालयुक्त नामक संवत्सर रहेगा, जबकि 15 अप्रैल से सिद्धार्थ नामक संवत्सर शुरू हो जाएगा।
कालयुक्त संवत्सर के प्रभाव में राजनैतिक और सामाजिक रूप से उग्रता बढ़ती दिखाई देगी । शासन और सत्ता का प्रभाव बढ़ेगा और बहुत सी जगहों पर प्रकृति का उग्र स्वरूप दिखाई देगा। यह संवत्सर उपद्रव एवं नकारात्मक प्रवृत्तियों का बोलबाला रहेगा ।, जनता एवं समाज में आक्रोश बना रहेगा और बहुत जगह तीव्र प्रतिक्रियाएं दिखाई देंगी ।
वर्ष के राजा और मंत्री के एक ही होने के कारण शासनऔर सत्ता में उच्च स्तरीय समन्वय दिखाई देगा। निर्णय त्वरित और प्रभावी होंगे। साथ ही सिद्धार्थ संवत्सर के कारण शासन, प्रशासन के कार्य येन केन प्रकारेण सिद्ध होते दिखाई देंगे।
किंतु बात इतनी सरल नहीं है। नववर्ष का प्रारंभ सूर्यग्रहण के काल में हो रहा है । 29 मार्च को लगने वाला सूर्य ग्रहण आंशिक है और भारत में दृष्टव्य नहीं हैं , किंतु इसका व्यापक और नकारात्मक प्रभाव विश्व के अन्य क्षेत्रों पर पड़ेगा। विशेष रूप से यूरोप पर इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा और साथ ही कनाडा, उत्तरी अमेरिका, उत्तरी अफ्रीका भी इसके नकारात्मक प्रभाव से अछूते नहीं रहेंगे। इन सभी क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं के साथ ही राजनीतिक और आर्थिक उलट पुलट, उपद्रव और कट्टर वाद बढ़ेगा।और इसके प्रभाव दूरगामी और अन्य देशों को भी प्रभावित करेंगे।
इस बार का नवसंवत्सर अनेकों प्रकार से अति महत्वपूर्ण है। सूर्यग्रहण काल में नवसंवत्सर का आरंभ होने के साथ ही , शनि देव का मीन राशि में गोचर जहां पहले से ही सूर्य, चंद्र,बुध, शुक्र और राहु विराजमान हैं। काल पुरूष के द्वादश भाव का वर्ष के राजा को लेकर अष्टम में बैठना और नौ में से छः ग्रहों का अष्टम में जमावड़ा , बहुत अच्छे संकेत नहीं दे रहा है।द्वी अष्टम धुरी पर केतु का प्रभाव भी दृष्टि गत है। बुध का नीचस्थ होकर वक्रावस्था में अस्त होना और शुक्र का वक्री होना , साथ ही आने वाले 15 दिनों में राहु और शनि की घनिष्ठ युति ।सभी मिलकर यही संकेत दे रहे हैं कि यह वर्ष एक मुश्किल वर्ष होगा और आने वालेदशकों के लिए कुछ बड़े और दूरगामी परिवर्तन लेकर आयेगा जो विश्व और देश की दशा और दिशा दोनों को बदलने वाला साबित होगा। जो भी लोग भी इस विश्लेषण को पढ़े ,वे अवश्य अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ ऐसे बदलाव लाने का प्रयास करें, जिससे परिस्थितियां संतुलित बनी रहें दिन में कुछ समय निकाल कर ईश्वर की प्रार्थना ,या अपनी आस्था अनुसार पूजा पाठ अवश्य करें , स्वहित देशहित और लोकहित के लिए।
🌺भौगोलिक और प्राकृतिक विश्लेषण ::: प्राकृतिक रूप से यह वर्ष उथल पुथल वाला है।इस वर्ष गर्मी चरम पर रहेगी और ज्यादा समय तक रहेगी। बीच-बीच में मौसम में सुधार होगा लेकिन वह अल्पकालिक होगा।
विश्व और देश के बहुत से हिस्से पानी की कमी से जूझते दिखाई देंगे। कुछ जगह तो स्थिति भयावह हो सकती है।
ग्लेशियरों के टूटने और पिघलने की घटनाएं तेज होगी और इससे भौगोलिक क्षेत्रों की स्थिति में भी बदलाव आ सकता है। उत्तरी इलाकों, हिमालय के क्षेत्रों, कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, नेपाल, सिक्किम, एवं पंजाब इत्यादि बाढ़ और भूस्खलन से जूझते दिखाई देंगे।
स्वीडन , स्विट्जरलैंड, जर्मनी, पोलैंड, लगभग यूरोप का बड़ा हिस्सा भी ऐसी घटनाओं से प्रभावित होगा।
जंगलों में आग लगने की घटनाओं में वृद्धि होगी। अतः प्रशासन एवं जनता को विशेष सावधानी बरतने की सलाह है।
🌺राजनीतिक विश्लेषण। ::: राजनीतिक रूप से भी वर्ष बहुत सारे उतार चढ़ाव से भरा रहने वाला है। विभिन्न देशों के बीच संबंधों के समीकरण बनते बिगड़ते रहेंगे। अड़ियल रवैया हावी रहने से संबंधों के सुचारू रूप से चलने में बाधाएं आयेंगी और बहुत प्रयास से तालमेल बनाए रखना होगा। कूटनीति अपने चरम पर रहेगी और इस वर्ष बनने वाले राजनीतिक समीकरण आने वाले कई दशकों की राजनीति की दिशा तय करेंगे।
सत्ता व प्रशासन के द्वारा लिए गये निर्णयों से जनता में असंतोष होगा। कुछ ऐसे नियम और कानून भी बनाए जा सकते हैं जिनका जनता के द्वारा कड़ा विरोध किया जाए। बहुत समय से लंबित पड़े सुधार संबंधी नियम व कानून को लागू किया जा सकता है, यद्यपि जनता के द्वारा धरना, प्रदर्शन और तीव्र विरोध होगा किंतु शासन प्रशासन के द्वारा कड़ाई से उन्हें लागू किया जा सकता है।
बहुत सारे देश अपने देश और अपने लोगों के हित में वैश्विक संबंधो को अधिक तवज्जो नहीं देंगे।
विदेश में रह रहे प्रवासियों, कामगारों और छात्रों के लिए यह मुश्किल समय साबित होगा। भारतीय छात्रों के लिए विदेश में समय अनुकूल नहीं रहेगा।
🌺सामाजिक और धार्मिक विश्लेषण। ::: यह काल धार्मिक रूप से अति सक्रिय रहने वाला है लोगों की धार्मिक रूझान बढ़ेगा। धार्मिक गतिविधियां, पूजा पाठ,भजन हवन और तीर्थाटन में पहले से अधिक उत्साह व वृद्धि होगी। वहीं दूसरी ओर धार्मिक और सांप्रदायिक विवाद भी बढ़ेंगे। किंतु शासन और सत्ता द्वारा उनको नियंत्रित किया जायेगा।भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, फ्रांस, स्पेन, ईरान, इजरायल इत्यादि सभी पहले से प्रभावित क्षेत्रों में धर्म संबंधी मसले हावी रहेंगे।
सामाजिक रूप से जनता में जहां एक ओर शासन , सत्ता के प्रति विद्रोह कीभावनारहेगी , वहीं सामाजिक और पारिवारिक जीवन में आपसी वैमनस्यता दिख सकती है। बड़े बुजुर्गो के साथ खींच तान या उनकी अवहेलना करने के व्यवहार में बढ़ोत्तरी होगी। रोगों का प्रभाव बढ़ सकता है।संक्रामक रोगों का भी प्रभाव बढ़ सकता है।सिर, गर्दन, जोड़ो, आंखों और पेंट के निचले हिस्सों तथा जननांगों से संबंधित रोग प्रभावी रहेंगे।
आतंकवादी घटनाएं सिर उठा सकती हैं, विशेष रूप से पंजाब और कश्मीर से लगे क्षेत्रों में।
🌺आर्थिक विश्लेषण। ::: आर्थिक रूप से यह वर्ष उतार चढ़ाव के बाद भी सामान्य रहेगा। किंतु यह उतार चढ़ाव चिंता बढ़ा सकते हैं। अधिक गर्मी के कारण खरीफ की फसल पर असर पड़ सकता है किन्तु रबी की फसल अच्छी होगी । फलों में रस और मिठास की कमी होगी।
अंगूर और आम की फसल अच्छी रहेगी।सोना , चांदी और तांबा धातुएं लाभप्रद रहेंगी।
🌺गुरु और शुक्र का परिवर्तन योग और मंगल की सुदृढ़ स्थिति मुश्किलों से भरे समय को संभाल कर आगे ले जाने में पूरी तरह से तत्पर है और इसके लिए बस इतना करना है कि अपने परिवार, मित्रों से सौहार्दपूर्ण संबंध रखें,संयम और नियम का पालन करें और अच्छे नागरिक की तरह कानून और व्यवस्था का पालन करते रहें।
बाकी अगले अंक में।यदि आपका कोई प्रश्न हैं तो पूछ सकते हैं,अगले विश्लेषण में उसका उत्तर देने का प्रयास किया जायेगा। बस प्रार्थना करना जारी रखें।
जय श्री कृष्ण 🙏🙏
सीमा श्रीवास्तव
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